कामधेनु संस्थान में वन महोत्सव,मासिक हवन और निशुल्क चिकित्सा शिविर का आयोजन
संजीव कृष्ण ठाकुर जी का स्वागत करते हुए श्रीमती शशि गुप्ता
नूँह/तावडू,19 जुलाई।
सुनील कुमार जांगड़ा,
कामधेनु आरोग्य वैलनेस संस्थान में आज वन महोत्सव, मासिक हवन और निशुल्क चिकित्सा शिविर का सफल आयोजन किया गया। आयोजन में क्षेत्र के अनेक महानुभावों और गोभक्तों ने भाग लेकर कार्यक्रम का लाभ उठाया।
इस अवसर पर बतौर मुख्य अतिथि माननीय न्यायमूर्ति श्री विनोद कुमार जी, दिल्ली उच्च न्यायालय, आशीर्वचन ठाकुर संजीव कृष्ण जी, भागवाताचार्य, गोभक्त, संस्थापक, समर्पण गौशाला, गोवर्धन, श्री सुभाष चंद्र यादव, चीफ कान्सर्वेटर ऑफ फॉरेस्ट, गुरुग्राम तथा हरियाणा राज्य और देश के अनेक महानुभाव उपस्थित रहे।
हवन से कार्यक्रम का शुभारम्भ किया । हवन का संचालन आदर्श गर्ग ने किया । हवन प्रथा के अनुसार जुलाई मास में वसुधा गोयल, संजय सचदेवा, शेफाली, भव्य सचदेव, विनीत, लव, आशुतोष गर्ग, प्रज्ञा के जन्मदिवस पर, लव और सौम्य के विवाह की वर्षगांठ, जगदीश अग्रवाल और शर्मिला जैन के स्वास्थ्य सुधार और नन्द किशोर गोएनका जी के स्वर्गवास पर उनके नाम से अग्नि देव को आहुति अर्पित की गई तथा समस्त मानव जाति के हित में सुख-शांति के लिए प्रार्थना की गई।
मञ्च का संचालन संस्थान के महामन्त्री प्रियंक गुप्ता ने किया। स्वागत कार्यक्रम में ठाकुर संजीव कृष्ण जी का स्वागत योगेश मोदी, मदन जिंदल और ब्रह्मदत्त ने, विनोद कुमार का यशपाल सिंघल, डॉक्टर एस पी गुप्ता और पुरेन्द्र गोयल ने और सुभाष चंद्र यादव का विशाल गर्ग, अनुपम गुप्ता और रुचिर गुप्ता ने गोगुल्लक, तुलसी का पौधा, कामधेनु स्मृति चिन्ह एवं पटका भेंट करके किया।
डॉक्टर एस पी गुप्ता ने मंचासीन महानुभावों का परिचय देते हुए बताया कि संस्थान मे वर्ष मे 3 बार वन महोत्सव मनाया जाता है और यहाँ पर निर्विघ्न रूप से मासिक हवन का आयोजन हो रहा है। उन्होंने बताया कि ठाकुर संजीव कृष्ण जी का साथ और मार्गदर्शन हमेशा रहा है। उन्ही की प्रेरणा से संस्थान मे कामधेनु मंदिर का भी निर्माण हुआ है। गुप्ता जी ने बताया कि न्यायमूर्ति विनोद कुमार जी का सरल व्यक्तित्व है और उनका गोमाता के प्रति असीम प्यार और स्नेह है। उन्होंने बताया कि सुभाष यादव बहुत बड़े गोभक्त है और मौन रहकर गुप्त रूप से गोसेवा करते रहते है। गुप्ता जी ने बताया कि गोमाता 24 घंटे हमे आक्सिजन प्रदान करती है। गोमाता को विश्वमाता कहा जाता है उसके बहुत से कारण है। गोमाता ऐसी माता है जो सभी को प्यार करती है। गोमाता के दूध, घी, दही, गोमूत्र और गोबर, इन पंचगव्य का उपयोग हमारे दैनिक जीवन मे तो है ही साथ ही साथ बहुत सी गंभीर बीमारियों मे भी इनका बहुत उपयोग है।
प्रियंक गुप्ता ने बताया कि ना केवल अच्छे स्वास्थ्य के लिए बल्कि संपत्ति अभिवृद्धि मे गोमाता का बहुत योगदान है इसके उन्होंने उदाहरण भी पेश किए। उन्होंने बताया कि ठाकुर संजीव कृष्ण से जब भी कोई उनकी गोशाला के बारे मे पूछता है तो वो हमेशा यही कहते है कि एक गोवर्धन धाम मे है और दूसरा यहाँ पर है।
उषा जैन ने बताया कि वह 60 वर्ष से अमरीका मे रह रही है लेकिन उन्हे अपने भारतीय होने पर गर्व है क्योंकि भारत ने उन्हे आध्यात्मिकता दी, संस्कार दिए, वैल्यूस दिए। उन्होंने “राम राम राम राम बोलो सत्संग मे, आओ सत्संग मे गाओ सत्संग मे...“ भजन गाकर सुनाया।
सुभाष चंद्र यादव जी ने बताया कि वो पिछले 3-4 वर्षों से संस्थान से जुड़े हुए है। संस्थान का गोमाता को और वन महोत्सव को जोड़ना बहुत अच्छी बात है। पर्यावरण संरक्षण के लिए वृक्षारोपण / पौधारोपण बहुत जरूरी है। उन्होंने हमारे आदरणीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नारे “एक पेड़ माँ के नाम” को जनमानस को अपनाने की प्रार्थना की। उन्होंने कहा कि हमे कम से कम दो पेड़ तो लगाने ही चाहिए एक अपने लिए और एक आने वाली संतति के लिए।
विनोद कुमार जी ने बताया कि वह यहाँ आने और निमंत्रित करने के लिए खासतौर पर संस्थान की संस्थापक अध्यक्षा शशि गुप्ता जी का बहुत-बहुत धन्यवाद करते है। उन्होंने श्री विनोबा भावे की गोरक्षा अभियान और महात्मा गांधी जी के जीवन मे गोसेवा के महत्व पर चर्चा की। उन्होंने बताया कि गोमाता और वन का अभिन्न संबंध है। उन्होंने बताया कि गोमाता और ग्रामीण व्यवस्था के पुनर्स्थापन की बहुत जरूरत है।
आचार्य संजीव कृष्ण ठाकुर जी ने अपने सम्बोधन मे बताया कि उनका यहाँ आना लगा रहता है और हर वर्ष 3-4 बार तो यहाँ आना होता ही है। उन्होंने कहा गोमाता ने गुप्ता जी को अपनी सेवा के लिए चुना है। अगर हम अपने घर मे गोमाता को नहीं रख सकते परंतु कम से कम अपने हृदय मे गोमाता को जरूर रखना चाहिए। उन्होंने इस प्रसिद्ध सूक्ति का उच्चारण किया :
पिबन्ति नद्यः स्वयमेव नाम्भः स्वयं न खादन्ति फलानि वृक्षाः।
नादन्ति सस्यं खलु वारिवाहाः परोपकाराय सतां विभूतयः॥
अथार्थ जैसे नदियाँ अपना जल स्वयं नहीं पीतीं, वृक्ष अपने फल खुद नहीं खाते और बादल अपनी वर्षा से उपजाया हुआ अन्न (सस्य) स्वयं नहीं खाते । उसी प्रकार, सज्जन पुरुषों की संपत्ति और महानता हमेशा परोपकार (दूसरों की भलाई) के लिए ही होती है। प्रकृति का यह नियम हमें यह सिखाता है कि जिस प्रकार नदियां, पेड़ और फूल अपने लिए नहीं, बल्कि दूसरों की भलाई के लिए जीते हैं, उसी प्रकार एक महान और अच्छे व्यक्ति का जीवन भी निःस्वार्थ भाव और समाज की सेवा के लिए समर्पित होता है। कबीर जी ने भी कहा है ““वृक्ष कबहुँ न फल भखै, नदी न संचय नीर / परमार्थ के कारने, साधुन धरा शरीर””।
हमारे सभी देवी देवताओं के साथ कोई ना कोई जीव है जैसे भगवान कृष्ण के साथ गोमाता है, भगवान शिव के साथ बैल है, गणेश जी के साथ चूहा है, माँ भगवती के साथ सिंह है, कार्तिकेय जी के साथ मोर है। इसके अलावा हमारे सभी देवी देवताओं के साथ कोई ना कोई वृक्ष और फूल भी जुड़ा है। भारत जैसी सभ्यता और संस्कृति कहीं नहीं है। मुफ़्त वैक्सीन बाटने वाला इकलौता देश भारत है। उन्होंने बताया कि हमारे शस्त्रों मे मातृ देवो भव , पितृ देवो भव, आचार्य देवो भव, अतिथि देवो भव की बात तो है ही। लेकिन आज की जरूरत के हिसाब से “परस्पर देवो भव” की अत्यंत आवश्यकता है। गोरक्षा स्वयं को बचाने की लड़ाई है। कहा जाता है कि “गाय मरी तो बचता कौन, गाय बची तो मरता कौन”। जो व्यक्ति गोमाता का दूध पीता है, गोमूत्र का सेवन करता है और आध्यात्मिक सेवा करता है तो उसे भौतिक कमी कभी नहीं रहती। जब आप गोसेवा के लिए एक रुपया भी देते है तो ध्यान रखना चाहिए कि वह हमारे सत्कर्म मे जुड़ता है। जो गोसेवा करता है उस पर गोपाल की कृपा अवश्य होती है। मेरे पास विचार शक्ति है और गुप्ता जी के पास क्रिया शक्ति है।
जो अधर्म करता है उससे बड़ा दोषी वह है जो अधर्म को होने देता है। जो धर्म को जानता है शास्त्रों को जानता है लेकिन हृदय मे रखकर बैठ जाता है वह भी अधर्मी है। अगर हम अच्छे काम नहीं कर सकते तो भी अच्छे काम का अनुमोदन अवश्य करें। हमे कृतज्ञ होना चाहिए कृतघ्न नहीं। उन्होंने “ॐ सर्वे भवन्तु सुखिनः । सर्वे सन्तु निरामयाः । सर्वे भद्राणि पश्यन्तु । मा कश्चित् दुःख भाग्भवेत्” से अपनी वाणी को विराम दिया।
मास्टर रिशान गुप्ता ने “नीड़ का पेड़” पर एक कविता प्रस्तुत की।
अध्यक्षा शशि गुप्ता ने अपने धन्यवाद प्रस्ताव में बताया कि जब ईश्वर कृपा होती है तो संतों का पधारना और उनके दर्शन होते है। संजीव कृष्ण ठाकुर तो उनके पारिवारिक संत है जो उनका निरंतर मार्गदर्शन करते है। श्री विनोद कुमार जी तो सादगी और विनम्रता की प्रतिमूर्ति है। उन्होंने स्वयं यहाँ गर्मी मे संस्थान के बाहर की सड़क पर खड़े होकर जलसेवा की है। श्री सुभाष यादव जी ने हमे याद दिलाया की हम प्रकृति को भूल रहे है और प्रकृति का निरंतर ह्रास हो रहा है। आज प्रकृति के संवर्धन और संरक्षण की बहुत आवश्यकता है। आज जितने नए पेड़ लगते है उससे ज्यादा हम काट देते है।
संस्थान मे पधारे हुए महानुभावों, गोभक्त अतिथियों ने वृक्षारोपण / पौधारोपण कार्यक्रम मे भाग लिया और निशुल्क चिकित्सा शिविर का भी लाभ लिया। इसके उपरांत मुख्य अतिथि एवं अन्य अतिथियों ने कामधेनु मन्दिर एवं कामधेनु आरोग्य वैलनेस संस्थान का अवलोकन किया तथा गौवंश को सवामणि एवं चारा अर्पित करने के उपरान्त प्रसाद ग्रहण किया ।
इस अवसर पर श्रीमती विष्णु भगवान, आदेश, अनूप, सुमित, संतोष यादव, तेजपाल यादव, तेजपाल तंवर, महेश, डॉक्टर नरेश कुमार जैन, डॉक्टर विवेक, रेनू सिंह, महेंदेर गोयल, सुरेंदेर रायज़ादा (ऐड्वकेट), राजेश पटेल, विनोद, सुषमा जी, उमा जी, अंजू जी, गजेन्द्र गुप्ता, संजय, जी डी शर्मा, जीतू यादव, सुदेश, नवीन झा, बृंदावन बिस्सर सहित क्षेत्रीय गांवों के गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
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