सोशल मीडिया पर तेजी से उभरा ‘रिजर्वेशन हटाओ आंदोलन’, लाखों लोग जुड़े; आरक्षण नीति पर छिड़ी नई बहस
नई दिल्ली, 27 जुलाई 2026। सोशल मीडिया पर इन दिनों ‘रिजर्वेशन हटाओ आंदोलन’ (RHA) तेजी से चर्चा में है। हाल की मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, अभियान से जुड़े इंस्टाग्राम अकाउंट ने कुछ ही दिनों में लाखों फॉलोअर्स जुटाए हैं। अमर उजाला ने सोमवार शाम अपनी रिपोर्ट में पांच दिनों में करीब 51 लाख फॉलोअर्स होने की बात कही, जबकि कुछ अन्य रिपोर्टों में यह आंकड़ा इसके आसपास या इससे अधिक बताया गया है।
यह अभियान मुख्य रूप से भारत में जाति आधारित आरक्षण व्यवस्था में बदलाव की मांग को लेकर सामने आया है। आंदोलन की अपनी वेबसाइट पर इसे नागरिकों द्वारा चलाया जा रहा अभियान बताया गया है और सरकारी नौकरियों व शिक्षण संस्थानों में जाति आधारित आरक्षण समाप्त करने की मांग प्रमुखता से रखी गई है।
अभियान के समर्थकों का तर्क है कि अवसरों में समानता और आर्थिक रूप से कमजोर लोगों की सहायता पर अधिक जोर दिया जाना चाहिए। वहीं आरक्षण के समर्थकों का कहना है कि आरक्षण केवल आर्थिक स्थिति का विषय नहीं है, बल्कि ऐतिहासिक और सामाजिक भेदभाव तथा प्रतिनिधित्व से भी जुड़ा है। सोशल मीडिया पर दोनों पक्षों के बीच इस मुद्दे को लेकर तीखी बहस देखने को मिल रही है। शिक्षक अभिनय मैथ्स ने भी इस चर्चा के बीच कहा कि आरक्षण को केवल कटऑफ के नजरिए से नहीं देखा जा सकता।
हाल के दिनों में सोशल मीडिया आधारित आंदोलनों की चर्चा बढ़ी है और ‘रिजर्वेशन हटाओ आंदोलन’ भी इसी क्रम में तेजी से सामने आया है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार अभियान की बढ़ती ऑनलाइन लोकप्रियता ने आरक्षण व्यवस्था, मेरिट, सामाजिक न्याय और समान अवसर जैसे मुद्दों पर एक नई राष्ट्रीय बहस खड़ी कर दी है।
फिलहाल इस ऑनलाइन समर्थन का आगे कोई बड़ा जमीनी आंदोलन या प्रदर्शन किस रूप में सामने आता है, इस पर नजर रहेगी। आरक्षण भारत का संवैधानिक और राजनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण विषय है, इसलिए सोशल मीडिया की मांग को वास्तविक नीति परिवर्तन में बदलने के लिए संवैधानिक, कानूनी और राजनीतिक प्रक्रियाओं से गुजरना होगा।
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